जल बिन
सब कुछ सून और पानी का ये सूनापन अब हर गली कूचे में नजर आने लगा है । गर्मी की
आहट भर है और देश के कई सूबों में पानी की किल्लत शुरू हो चुकी है । देश के कई राज्यों
में सूखे के हालात हैं ...जिसकी वजह से इन राज्यों में पानी की भारी किल्लत हो
चुकी है । लोग दूर दराज के क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा
हालात खराब हैं महाराष्ट्र में जहां कई ज़िले सूखे की चपेट में हैं। लेकिन लातूर
में हालात बद से बदतर हो चुके हैं । जहां पानी को लेकर हाहाकार मची हुई है...लातूर
में पानी को लेकर धारा 144 लागू कर
दी गई है । पानी के टैंकरों पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है।

तो उधर मध्य प्रदेश
में भी सूखे के कारण लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । टीकमगढ़
में तो बंदूकों के साये में पानी की रखवाली की जा रही है । ताकि कहीं पानी की चोरी
न हो जाए । ठाणे में तो मार्च के महीने से ही पानी की कटौती जारी है। पानी की सबसे
बड़ी वजह कमजोर मानसून को माना जा रहा है। वहीं जलस्तर का लगातार नीचे जाना भी
सूखे की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। धरती के नीचे जलस्तर कम हो रहा है
...प्राकृतिक जल स्त्रोतों के अत्यधिक इस्तेमाल की वजह और इसके दुरूपयोग के कारण
आज हमारे सामने पानी की किल्लत बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो चुकी है । पेड़ों की
अंधाधुंध कटाई के कारण ये समस्या और भी विकराल रूप धारण कर चुकी है क्योंकि ये
पेड़ ही होते हैं जो बरसाती पानी को जज्ब कर लेते हैं और धरती की नमी को बनाए रखते
हैं। लेकिन इन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की वजह से जहां ग्लोबल वार्मिंग बढ़ चुकी
है जिसकी वजह से ग्लेश्यिर जिनसे हम सारा साल पानी लेते हैं ...जो हमारे लिए पानी
का बेहतरीन स्त्रोत हैं तेजी से पिघलने लगे हैं। जिसके चलते देश में कभी बाढ़ तो
कभी सूखे जैसे हालातों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है । लोगों में जागरूकता की
कमी के चलते पानी का दुरूपयोग लगातार किया जा रहा है । पानी की कमी की एक वजह
रिवायती फसलों की बिजाई करना भी है ...क्योंकि धान जैसी फसलों में पानी की सबसे
ज्यादा खपत होती है । लेकिन किसान इन रिवायती फसलों को ही बो रहे हैं ...जिसकी वजह
से जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। पानी आज हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती बन चुका
है और पानी की ये कमी आने वाले दिनों में और भी विकराल रूप धारण कर सकती है । देश
के कई राज्यों में सूखे से स्थिति भयावह हो चुकी है । लोग बूंद बूंद को मोहताज हो
चुके हैं । महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तट पर बने रामकुंड का पानी भी
पूरी तरह से सूख चुका है । जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों से
दो चार होना पड़ रहा है । देश में सूखे की भयावह होती स्थिति आने वाले दिनों और भी
विकराल रूप धारण कर सकती है । पानी को संरक्षित करने के लिए जरूरी है कि जन
जन को इस के लिए जागरूक किया जाए ।
शमिन्दर
कौर कलेर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें