पंजाब जिसे पांच आब की धरती कहा जाता था ,पांच आब यानि की पांच नदियों का प्रदेश । लेकिन आज पांच नदियों के इस प्रदेश को लगता है किसी की नज़र लग चुकी है। कोई वक्त् था जब पंजाब को एक ख़ुशहाल प्रदेश के तोर पर जाना जाता था। पंजाब की ज़रख़ेज़ धरती ने न केवल देश मे अन्न की कमी को पूरा किया बल्कि देश भर में ये सूबा हरित क्रांति के लिए जाना जाने लगा। अन्न उत्पादन में इस प्रदेश ने पहला दर्ज़ा हासिल किया।
इसी धरती पर ही गुरु साहिबों ने जनम लिया और पूरी मानवता को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। यही नहीं इसी धरती पर ही महान योद्धो ने जन्म लिया । इसी धरती पर पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी ने न केवल सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई बल्कि पूरी मानवता को जाति पाति से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश दिया...यहीं नहीं गुरू साहिबान ने मास मदिरा से दूर रहने समेत अन्य कई बुराईयों से दूर रहने का संदेश भी दिया ...पर बहुत ही अफसोस की बात है कि आज हम गुरू साहिबान के उन संदेश पर अमल करने की बजाए उनके संदेश और गुरूबाणी की इस हकीकत से दूर हो चुके हैं ...गुरू साहिबान की शिक्षाओं पर चलने की बजाए उन्हें अनदेखा कर रहे हैं ...गुरू साहिबान ने नशे जैसी बुराईयों से दूर रहने के लिए कुछ इस तरह से वर्जित किया था ....
इसी धरती पर ही गुरु साहिबों ने जनम लिया और पूरी मानवता को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। यही नहीं इसी धरती पर ही महान योद्धो ने जन्म लिया । इसी धरती पर पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी ने न केवल सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई बल्कि पूरी मानवता को जाति पाति से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश दिया...यहीं नहीं गुरू साहिबान ने मास मदिरा से दूर रहने समेत अन्य कई बुराईयों से दूर रहने का संदेश भी दिया ...पर बहुत ही अफसोस की बात है कि आज हम गुरू साहिबान के उन संदेश पर अमल करने की बजाए उनके संदेश और गुरूबाणी की इस हकीकत से दूर हो चुके हैं ...गुरू साहिबान की शिक्षाओं पर चलने की बजाए उन्हें अनदेखा कर रहे हैं ...गुरू साहिबान ने नशे जैसी बुराईयों से दूर रहने के लिए कुछ इस तरह से वर्जित किया था ....
बाबा होर खाणा खुशी खुआर ,
जितहू खाधै तन पीड़ियै,मन माहि चले विकारि
श्री गुरू नानक देव जी ने नाम की खुमारी चढ़े रहने का संदेश दिया था .... प्रभु नाम की इस खुमारी को रात दिन चढ़े रहने की बात उन्होंने कही थी ...
नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात
गुरू नानक देव जी ही नहीं हर संत महात्मा ने नशे से दूर रहने का संदेश दिया और प्रभु भक्ति के आड़े आने वाली मास मदिरा और अन्य बुरी आदतों को त्यागने का संदेश दिया ... लेकिन इन शिक्षाओं पर अमल करने की बजाए हम अनदेखी कर रहे हैं ...यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी नशे में गलतान हो चुकी है ...जो पंजाब कभी खुशहाल सूबे के तौर पर जाना जाता था वो आज नशे रूपी नदी में बहता जा रहा है ... पंजाब की जरखेज़ धरती जो कभी हरित क्रांति के नाम विख्यात थी उसे आज नशे ने बंजर कर दिया है ...यहां के मेहनतकश लोग मेहनत से जी चुराने लगे हैं ...रही सही कसर निकाल दी है बेरोजगारी ने ...रोजगार की तलाश में यहां के लोग विदेश जा रहे हैं ...
Totally agree with you it nice articles
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