आरक्षण की आग में झुलसता
हरियाणा
हरियाणा में आरक्षण की चिंगारी अब भयंकर आग का रूप धारण कर चुकी है ।
जाटों की ओर से शुरू किया गया ये आंदोलन अब उग्र हो चुका है । जाट आंदोलन की वजह
से हरियाणा में हालात बद से बदतर हो चुके हैं ।
जिसके चलते हरियाणा सरकार की ओर से सूबे के कई जिलों में कफ्र्यू तक लगाना पड़ा है,वहीं कफ्र्यू वाले जिलों में हिंसा करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए गए हैं । राज्य के कई हिस्सों में आगजनी के दौरान अब तक कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर जाट न केवल प्रदेश का माहौल खराब कर रहे हैं,बल्कि उनके निशाने पर हरियाणा के कई मंत्री भी हैं जो जाट आरक्षण को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं उनके घरों पर हमलों का सिलसिला शुरू हो चुका है । जाट आंदोलन से जुड़े लोगों ने सांसद राजकुमार सैनी और कैप्टन अभिमन्यू के घर को निशाना बनाया है । राजकुमार सैनी के घर पर आंदोलनकारियों ने पत्थर फेंके और कैप्टन अभिमन्यू के घर को भी निशाना बनाया । आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों ने हिसार और रोहतक में टोल प्लाजा समेत निजी वाहनों ,सरकारी इमारतों और कार्यालयों को भी अपना निशाना बनाया है। राज्य में हालात को बेकाबू होते देख हिंसा प्रभावित जिलों में सेना को बुला लिया गया है । हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिगड़ते हालातों को देखते हुए अमन शांति की अपील की है,वहीं उन्होंने कहा है कि वे आरक्षण के विरोध में नहीं हैं । उन्होंने इसके लिए उचित रस्ता निकालने की भी बात कही है ,लेकिन इसके बावजूद इस अपील का कोई भी असर जाट नेताओं पर पड़ता नहीं दिख रहा है । हालांकि हरियाणा सरकार की ओर से इस मामले के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति की याचिका भी दायर की गई है ,लेकिन जाट नेता आंदोलन पर अमादा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जाट समुदाय को दिए आरक्षण को रद्द कर दिया था लेकिन कोर्ट के इस फैसले को मानने की बजाए जाटों की ओर से आरक्षण की मांग की जा रही है ।गौरतलब है कि 17 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए जाट समुदाय को दिए आरक्षण को रद्द कर दिया था । यूपीए सरकार ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर जाटों को आरक्षण देने का फैसला किया था । लेकिन कोर्ट ने जायज नहीं बताते हुए कहा था किे तत्तकालीन सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को नज़रअंदाज किया है । कोर्ट के इस फैसले के बाद ही जाटों ने संघर्ष का ऐलान कर दिया था ।
जिसके चलते हरियाणा सरकार की ओर से सूबे के कई जिलों में कफ्र्यू तक लगाना पड़ा है,वहीं कफ्र्यू वाले जिलों में हिंसा करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए गए हैं । राज्य के कई हिस्सों में आगजनी के दौरान अब तक कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर जाट न केवल प्रदेश का माहौल खराब कर रहे हैं,बल्कि उनके निशाने पर हरियाणा के कई मंत्री भी हैं जो जाट आरक्षण को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं उनके घरों पर हमलों का सिलसिला शुरू हो चुका है । जाट आंदोलन से जुड़े लोगों ने सांसद राजकुमार सैनी और कैप्टन अभिमन्यू के घर को निशाना बनाया है । राजकुमार सैनी के घर पर आंदोलनकारियों ने पत्थर फेंके और कैप्टन अभिमन्यू के घर को भी निशाना बनाया । आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों ने हिसार और रोहतक में टोल प्लाजा समेत निजी वाहनों ,सरकारी इमारतों और कार्यालयों को भी अपना निशाना बनाया है। राज्य में हालात को बेकाबू होते देख हिंसा प्रभावित जिलों में सेना को बुला लिया गया है । हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिगड़ते हालातों को देखते हुए अमन शांति की अपील की है,वहीं उन्होंने कहा है कि वे आरक्षण के विरोध में नहीं हैं । उन्होंने इसके लिए उचित रस्ता निकालने की भी बात कही है ,लेकिन इसके बावजूद इस अपील का कोई भी असर जाट नेताओं पर पड़ता नहीं दिख रहा है । हालांकि हरियाणा सरकार की ओर से इस मामले के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति की याचिका भी दायर की गई है ,लेकिन जाट नेता आंदोलन पर अमादा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जाट समुदाय को दिए आरक्षण को रद्द कर दिया था लेकिन कोर्ट के इस फैसले को मानने की बजाए जाटों की ओर से आरक्षण की मांग की जा रही है ।गौरतलब है कि 17 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए जाट समुदाय को दिए आरक्षण को रद्द कर दिया था । यूपीए सरकार ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर जाटों को आरक्षण देने का फैसला किया था । लेकिन कोर्ट ने जायज नहीं बताते हुए कहा था किे तत्तकालीन सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को नज़रअंदाज किया है । कोर्ट के इस फैसले के बाद ही जाटों ने संघर्ष का ऐलान कर दिया था ।
लेकिन अब
सवाल ये उठता है कि इस आंदोलन से क्या जाटों को आरक्षण मिल जाएगा ?अब तक
जाट आंदोलन के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति का बड़ा नुकसान हो चुका है । यही नहीं
जानी नुकसान भी हो चुका है । कुल मिलाकर देखा जाए तो इस मामले का कोई हल निकलता
दिखाई नहीं दे रहा सरकार की ओर से जाटों को आश्वासन दिए जाने के बावजूद जाट नेता
किसी की सुनने को तैयार नहीं । बहरहाल हरियाणा में हालात बेहद नाजुक होते जा रहे
हैं जाटों के इस आंदोलन को देखते हुए कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है और
हरियाणा के कई जिलों में कफर्यू लगा दिया गया है । कुल मिलाकर देखा जाए तो ये मसला
सरकार के गले की फांस बन चुका है और इस हाल फिलहाल तो इस मसले का कोई हल निकलता
दिखाई नहीं दे रहा । जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है आम लोगों को जो ट्रेनें
रद्द होने की वजह से अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं । जाटों के आरक्षण की
ये जिद्द गेहूं के
साथ घुन के पिसने की कहावत को चरितार्थ करती है ।अब देखना ये होगा कि इस मसले का
हल कब तक निकल पाता है या फिर ऐसे ही लोगों को जाट आरक्षण की आग में झुलसना होगा ?
शमिन्दर कौर कलेर

perfectly right
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