बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

मज़हब नहीं सिखाता..........

शमिन्दर कौर कलेर

              मज़हब नहीं सिखाता..........


            भारत जिसे धर्म निरपेक्ष देश के तौर पर जाना जाता है ,भारत में हर ​जाति और धर्म के लोग आपसी भाईचारे और सहयोग से रहते हैं ...लेकिन धर्म के ठेकेदार आपसी भाईचारे और शांति को भंग कर अपनी रोटियां सेंकने से बाज नहीं आते और ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं ...
कभी धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है,कहीं राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीति ,तो कहीं जाति के नाम पर राजनीति ,तो कहीं आरक्षण के नाम हिंसा भड़का कर ​​हिंदुस्तान की शांत आबोहवा में ज़हर घोलने की कोशिश की जा रही है...इसमें कुछ सफेदेपोशों की संलिप्तता ने सबको चौंका ​दिया है...जिसकी मिसाल हरियाणा में हुए जाट आंदोलन के दौरान हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा के सलाहकार रहे प्रो विरेंद्र के लीक हुए आडियो क्लिप से हो चुकी है...  लेकिन ​ताजा मामला सामने आया है ...महाराष्ट्र के लातूर से जहां धर्म के ठेकेदारों ने इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला काम किया है ...जी हां महाराष्ट्र में एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें मुस्लिम समुदाय के एक एएसआई को जबरन भगवा झंडा पकड़ा कर पूरे गांव में जुलूस निकाला गया...यहीं नहीं उसके साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई...और उसे अपमानित किया गया... घायल हालत में एएसआई को अस्पताल में दाखिल कराया गया है...एएसआई यूनुस शेख का कहना है कि उन्होंने लोगों की मिन्नतें की ...लेकिन वे त​ब तक मुझे मारते जब त​क कि मैं बेहोश होकर गिर नहीं गया ...यहीं नहीं उपद्रवियों ने उनसे 'जय भवानी' 'जय शिवाजी' के नारे भी लगवाए...ये घटना 20 फरवरी की है ...जब 100 के करीब लोगों ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया ....आपको बता दें कि 19 फरवरी की रात दो दर्जन के करीब युवक छत्रपति शिवाजी की जयंती पर भगवा झंडा फहराने आए थे...तो पुलिस कर्मियों ने सभी को लौटा​ दिया था​...जिसके अगले दिन ही इन युवकों ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया...युनूस शेख का कहना है कि उन्होंने कंट्रोल में फोन कर इसकी जानकारी दी थी ...लेकिन हमले के दो घंटे बाद तक भी उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा ...और किसी ने उनकी कोई मदद नहीं की ...मीडिया में इस मामले के आने के बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री राम शिंदे का कहना है कि इस मामले में आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और जांच चल रही है ...
      मजहब ,जाति और धर्म के ठेकेदारों के बहकावे में आकर कई लोग भीड़ का हिस्सा बनकर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली ऐसी वारदातों को अंजाम दे देते हैं ..जो कई बार ​बहुत बड़ी हिंसा और दंगों की वजह बन जाती है ...लेकिन हमारी और समाज की भलाई इसी में है कि हम ऐसी भीड़ का हिस्सा बनने से पहले खुद सोच ​विचार करें... कि हमारी एक छोटी सी गलती कई बार दो समुदायों के बीच तनाव और टकराव की ऐसी वजह बन जाती है जो ताउम्र पीड़ितों को सालती रहती है ...गुरूबाणी में भी कहा गया है ...
       अवल अल्लाह नूर उपाया कुदरत दे सब बंदे
      एक नूर तै सब जब उपजिया कौन भले कौ मंदे
तो फिर हम क्यों धर्म ,जाति के नाम पर बंटकर एक दूसरे के खून के प्यासे हो चुके हैं ...सोचिए ...ज़रा सोचिए ...ये हम सबको ही सोचना होगा ?

                        

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें