गुरुवार, 25 अगस्त 2016

                                 

    फरीदा खाक न निंदिये ,खाक जेड न कोई 

बाबा फरीद साहिब ने अपनी वाणी में पूरी इंसानियत को अहंकार,निंदा और चुगली से बचने का संदेश दिया ...उनकी वाणी का एक एक शब्द उस परमात्मा की महिमा करती है...आज हम आपको बाबा फरीद जी के बारे में जानकारी देंगे...बाबा फरीद जी का पूरा नाम फरीद मसउद शकरगंज था...उनका जन्म 1172 में पाकिस्तान के मुलतान के गांव खोतवाल में हुआ था...उनके पिता का नाम शेख जमान सुलेमान और माता का नाम मरीयम था ...उनकी मां बहुत ही धार्मिक प्रवृति की थीं उनकी शिक्षाओं का असर बाबा जी पर बहुत था ...यही वजह थी कि बाबा फरीद साहिब बारह वर्ष की आयु में ही कुरान मजीद का अध्ययन कर गए थे ...कहा जाता है कि वे मौखिक रूप से भी इसे याद कर चुके थे ...शेख फरीद जी के पूर्वज महमूद गजनवी से संंबंध रखते थे ...उनके पिता गजनवी के भतीजे थे ...सुलेमान पहले हिंद आ गए और फिर वहां से लाहौर आ गए ...वे बहुत ही धार्मिक प्रवृति के थे ...उन्होंने पाकपटन में अपना ठिकाना बना लिया ,यहीं पर शेख फरीद जी का जन्म हुआ ...उनका जन्म पहली पातशाही साहिब श्री गुरु नानक देव जी के जन्म से करीब सौ साल पहले का माना जाता है ...बाबा फरीद जी के माता जो कि बहुत ही धार्मिक विचारों वाले थे उन्होंने एक दिन फरीद साहिब को परमात्मा की भक्ति से जुडने के लिए कहा...उसके बाद शेख फरीद जी के मन में परमात्मा की भक्ति का प्यार पैदा हुआ और वो परमात्मा की भक्ति के लिए घर से निकल पडे ...उन्होंने बारह साल तक जंगल में रह कर भक्ति की ...इस दौरान न तो उन्हें गर्मी सर्दी का ख्याल रहता और न ही बारिश का ...हर वक्त परमात्मा की भक्ति से जुडे रहने के कारण उनके बाल जुड गए थे ...बारह साल तक तप करते करते उनके मन में अहंकार आ गया था और एक दिन उनके मन में परमात्मा को परखने का ख्याल आया ...उन्होंने चिढियों को कहा मर जाओ और चिढियां मर गईं ...फिर उन्होंने कहा कि चिढियो मर जाओ तो चिढियां जीवित हो गई ...इस के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब उनकी भक्ति पूर्ण हो चुकी है और वो घर की तरफ रवाना हो गए ! रास्ते में जब वे घर वापिस आ रहे थे तो रास्ते में उन्हें प्यास लगी तो रास्ते में एक कुंए के पास एक लड़की पानी कुंए से निकालती और डोलची में भरे पानी को बाहर फेंक देती ...फरीद साहिब ने उस लड़की को पानी पिलाने के लिए कहा ...लेकिन उसने फरीद साहिब की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और अपना काम करती रही ...वो पानी निकालती और बाहर बहा देती ...फरीद साहिब को गुस्सा आया और वो कहने ​लगे कि मैं तुम्हें कब से कह रहा हूं कि मुझे पानी पिला दो तुम मुझे पानी की बजाए पानी व्यर्थ में बहा रही हो ...इस पर उस लड़की ने जवाब दिया कि मेरी बहन के घर में आग लग गई है उसे बुझा रही हूं जो यहां से कुछ ही मील की दूरी पर है ...बाबा फरीद जी ये बात सुनकर बहुत हैरान हुए और इसके बाद वो लडकी फिर से बोली यहां पर ये नहीं कि चिढ़ियो मर जाओ और चिढ़ियां मर जाएंगी...बाबा फरीद साहिब हैरानी के साथ उस लड़की की तरफ देखने लगे ...उन्होंने उस लड़की से अर्ज की कि तुम भले ही मुझे पानी पिलाओ या न ,लेकिन मुझे ये बता दो कि ये बात तुम्हें कैसे पता चली ...लड़की ने जवाब दिया कि मैं सेवा और अपने पति को प्रेम करती हूं लेकिन मैंने इस तपस्या और सेवा का कभी भी अहंकार नहीं किया ...आपने तो परमात्मा की परी​क्षा ली है ...उसको आजमा कर आपने उस परमात्मा पर संदेह जताया है जो कि बिल्कुल भी ​उचित नहीं है ...थोड़ी देर फरीद साहिब देखते हैं कि उस जगह पर न तो कोई लड़की है न कुआं और न ही डोलची क्योंकि परमात्मा ने ये चमत्कार खुद ही रचा था ... उन्हें समझाने के लिए ...बाबा फरीद जी घर पहुंचे तो उनकी माता ने फरीद साहिब के जुड़ चुके बाल संवारने शुरू कर दिए ...उन्हें बहुत तकलीफ महसूस हुई ...इस पर उनकी माता ने कहा कि जिन वृक्षों के फल और फूल तोड़ कर खाए थे क्या उन्हें तकलीफ नहीं हुई थी ...इसी तरह यदि किसी को दुख देते हैं तो खुद भी दुख उठाना पड़ता है ...उन्होंने कहा कि हर जीव में परमात्मा का नूर हैं और चाहे वे कोई परिंदा है या फिर इंसान ...इसके बाद फरीद साहिब को महसूस हुआ कि उनकी भक्ति अधूरी है और उनके मन में फिर से परमात्मा की भक्ति का ख्याल आया ...उन्होंने अपना घर छोड़ दिया थ और वे न तो पेड़ों से कुछ तोड़कर खाते थे नीचे गिरी हुई वस्तु ही खाकर अपना पेट भरते थे ...भक्ति करते करते कई साल बीत गए और उनकी काया बहुत ही कमजोर हो चुकी थी ...मन में प्रभु दर्शन की अभिलाषा थी पर परमात्मा के दर्शन नहीं थे ..उनके मन की अवस्था उनके एक श्लोक में होती है ...



गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

दोमुंहों से ज़रा बचकर .........





वो हंस हंस कर अकसर बातें करते थे
 लेकिन कौन जाने कि क्या वो दिल में दबाए बैठे थे
 बगल में छुरी और मुंह पर राम का नाम जपाते थे
हमें भी एक बार तो ऐसा ही लगा कि सब अपने हैं
अपनों से भला क्या ​कोई कुछ क्यों ​छिपाएगा
यही सोच कर हम हर बात हर किसी को बताया करते थे
लेकिन धीरे धीरे ये मीठी छुरियां
हमें ही अपने ज़हरीले डंक से डंस लेगी एक दिन
इस बात का कभी अंदाज़ा न था

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

पहला जीउ पानी है जितु हरिया सब कोई.......





              जल बिन सब कुछ सून और पानी का ये सूनापन अब हर गली कूचे में नजर आने लगा है । गर्मी की आहट भर है और देश के कई सूबों में पानी की किल्लत शुरू हो चुकी है । देश के कई राज्यों में सूखे के हालात हैं ...जिसकी वजह से इन राज्यों में पानी की भारी किल्लत हो चुकी है । लोग दूर दराज के क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा हालात खराब हैं महाराष्ट्र में जहां कई ज़िले सूखे की चपेट में हैं। लेकिन लातूर में हालात बद से बदतर हो चुके हैं । जहां पानी को लेकर हाहाकार मची हुई है...लातूर में पानी को लेकर धारा 144 लागू कर दी गई है । पानी के टैंकरों पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है।



शनिवार, 19 मार्च 2016

हौसलों की उड़ान ​

     
                                                       
     महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं चाहे वो लड़ाकू विमान चलाने की बात हो,चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल का मैदान , हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। लेकिन अब कृषि के क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपना दबदबा कायम किया है । कृषि क्षेत्र में अपने बूते पर एक मिसाल कायम की है यमुनानगर के गांव हरेवा की सोना देवी ने । जिसने धान की औसत पैदावार निकालने में पहला स्थाान हासिल किया है । सोना देवी की इसी उपलिब्ध को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि मेले के दौरान सोना देवी को कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया है । सोना देवी ये पुरस्कार पाकर बेहद खुश हैं ...आज उनकी इस उपलिब्ध पर पूरा हरियाणा गर्व कर रहा है । 

गुरुवार, 3 मार्च 2016

जज़्बे को सलाम



                                  
शमिन्दर कौर कलेर

          दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता... ये साबित कर दिखाया है ​कैथल से बीस ​किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव नौच की एक महिला  ने... जिसने ज़िंदगी में हार मानना कभी सीखा ही नहीं ... अपनी इसी हिम्मत की बदौलत आज वो आज अपने पैरों पर खड़ी है और किसी पर बोझ नहीं है ...

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

आरक्षण की आड़ में दरिंदगी




              आरक्षण की आड़ में दरिंदगी  
शमिन्दर कौर कलेर


                हरियाणा में शुरू आरक्षण को लेकर उठी आग भले ही ठंडी हो चुकी है ...लेकिन आरक्षण की आड़ में शुरू हुए इस आंदोलन के बाद हरियाणा में कुछ बचा है तो वो है बर्बादी का मंज़र ...स्कूल हों ,ढाबे हों ,मॉल हों सब कुछ आरक्षण की इस आग की भेंट चढ़ गया है ...हर तरफ बर्बादी के निशां देखने को मिल रहे हैं ...इस आंदोलन ने हरियाणा में चल रही विकास की रफ्तार को सिर्फ धीमा ही नहीं किया है बल्कि हरियाणा को कई साल पीछे  धकेल दिया है ...लेकिन आंदोलन का एक घिनौना चेहरा भी सामने आया है.

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

मज़हब नहीं सिखाता..........

शमिन्दर कौर कलेर

              मज़हब नहीं सिखाता..........


            भारत जिसे धर्म निरपेक्ष देश के तौर पर जाना जाता है ,भारत में हर ​जाति और धर्म के लोग आपसी भाईचारे और सहयोग से रहते हैं ...लेकिन धर्म के ठेकेदार आपसी भाईचारे और शांति को भंग कर अपनी रोटियां सेंकने से बाज नहीं आते और ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं ...

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

आरक्षण की आग में झुलसता हरियाणा

                      आरक्षण की आग में झुलसता हरियाणा 


                 हरियाणा में आरक्षण की चिंगारी अब भयंकर आग का रूप धारण कर चुकी है । जाटों की ओर से शुरू किया गया ये आंदोलन अब उग्र हो चुका है । जाट आंदोलन की वजह से हरियाणा में हालात बद से बदतर हो चुके हैं ।

सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

लम्हों ने ख़ता की थी ..



                 आज जहां पूरा विश्व प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरण में प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रहा है ...पर्यावरण में प्रदूषण जहां पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय बन चुका है ...वहीं पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए पूरा विश्व मंथन में जुटा है ..

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

पंचायत का ये कैसा फरमान


   गांवों में पंचायतों की खास अहमियत होती है ...और गांव के सरपंच और पंचों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है ...और ये पंच सरपंच ही गांव के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ...पहले पंचों को पंच परमेश्वर का दर्जा दिया जाता था और उनकी ओर से सुनाया गया फैसला ही सर्वमान्य होता था ...क्योंकि उन फैसलों में लोगों की भलाई छिपी होती थी और वो न्यायसंगत होते थे ...समय के बदलाव के साथ साथ अब पंचायतों की कार्यशैली में भी बदलाव आया है ... अब पंचायतें पहले जैसी नहीं रही ....

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

अज्ज लग्गी नज़र पंजाब नूं-2

पंजाब सरहदी सूबा होने का संताप हमेशा से भोगता रहा है ...कभी आतंकवाद ,कभी सीमा पार से होने वाली फायरिंग और कभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नशा तस्करी...लेकिन आज हम पंजाब में सबसे बड़ी जिस समस्या की बात कर रहे हैं वो है नशा...

अज्ज लग्गी नज़र पंजाब नूं-1

पंजाब  जिसे पांच आब की  धरती कहा जाता था ,पांच आब  यानि  की पांच  नदियों  का प्रदेश  । लेकिन आज पांच  नदियों  के इस प्रदेश को लगता है किसी की नज़र  लग चुकी है। कोई  वक्त् था जब पंजाब  को एक ख़ुशहाल प्रदेश के  तोर पर जाना जाता था। पंजाब की ज़रख़ेज़ धरती ने न केवल देश मे अन्न  की कमी को पूरा किया बल्कि देश भर में ये सूबा हरित क्रांति के लिए जाना जाने लगा। अन्न उत्पादन में इस प्रदेश ने पहला दर्ज़ा  हासिल किया।