गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

पंचायत का ये कैसा फरमान


   गांवों में पंचायतों की खास अहमियत होती है ...और गांव के सरपंच और पंचों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है ...और ये पंच सरपंच ही गांव के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ...पहले पंचों को पंच परमेश्वर का दर्जा दिया जाता था और उनकी ओर से सुनाया गया फैसला ही सर्वमान्य होता था ...क्योंकि उन फैसलों में लोगों की भलाई छिपी होती थी और वो न्यायसंगत होते थे ...समय के बदलाव के साथ साथ अब पंचायतों की कार्यशैली में भी बदलाव आया है ... अब पंचायतें पहले जैसी नहीं रही ....

पंचायतों की ओर से ऐसे ऐसे तुगलकी फरमान सुनाए जाते ​हैं कि इंसानियत ही शर्मसार हो जाए ... हरियाणा की खाप पंचायतें हों या फिर उत्तर प्रदेश या फिर अन्य राज्य की पंचायतें अपने तुगलकी फरमानों की वजह से ये पंचायतें अकसर चर्चा का विषय बनती हैं ...लेकिन आज हम जिस पंचायत की बात करने जा रहे हैं वो है महाराष्ट्र के एक ज़िले नंदुरबार की ...जिसने एक महिला को ऐसा ही एक फरमान सुनाया है कि हर किसी का सिर शर्म से झुक जाए ...जी हां यहां की पंचायत ने महिला को अपनी पाकीज़गी को साबित करने के लिए भरी पंचायत में नग्नावस्था में चलने आने और गर्म कुल्हाड़ी से दागने का फरमान सुनाया है ... पंचायत का कहना है कि यदि महिला अपनी पवित्रता साबित करती है तो इससे उसको कोई नुकसान नहीं होगा ...लेकिन महिला ने इस फरमान को मानने से इनकार कर दिया है ...यहीं नहीं पंचायत के इस  फरमान की उसने पुलिस के पास भी शिकायत की है ...



   आखिर इस महिला के खिलाफ पंचायत ने इस तरह का फरमान क्यों सुनाया ....आखिर क्या वजह रही इस सारे वाक्या के पीछे ...इस पर भी गौर फरमाईएगा ... दरअसल कुछ वक्त पहले महिला के पति की मौत हो गई थी ...जिसके बाद महिला के ससुराल वाले उस पर अपने देवर से शादी करने का दबाव बना रहे थे ...लेकिन महिला ने देवर के साथ शादी से इनकार कर दिया ...बस यही बात ससुराल वालों को नगंवार गुजरी और उन्होंने महिला पर तरह तरह के आरोप लगाने शुरू कर दिए...हद तो तब हो गई जब महिला पर किसी गैर मर्द के साथ अवैध संबंध रखने का आरोप लगा दिया ...जिसके बाद ये मामला पंचायत के पास पहुंचा ... और पंचायत ने महिला को अपनी पवित्रता साबित करने के लिए ये फरमान सुना दिया ...जिसके बाद महिला ने पंचों के खिलाफ ​पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई ...न्याय की दरकार में महिला ने पुलिस के पास पहुंची ...लेकिन यहां पर भी पीड़ित महिला को कोई न्याय नहीं मिला... महिला पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है ....क्योंकि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर पंचों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया...महिला का कहना है कि पुलिस की ओर से पंचों से बांड पेपर पर आगे से ऐसा न करने की बात लिखवा कर छोड़ दिया है... और ये पंच अब उसे कई तरह की धमकियां दे रहे हैं ...और उसका गांव में ​बहिष्कार कर दिया गया है ...अब उसे किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता ...
      बहरहाल पंचायत के  शर्मसार कर देने वाले इस फरमान  ने एक बार फिर पंचायत के फैसलों पर सवालिया निशान लगा दिया है ...वहीं पुलिस की नीयत और नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं ...क्योंकि पुलिस ने जिस तरह का ढुलमुल रवैया अपना रखा है उससे तो यही साबित होता है कि पुलिस इस मामले में कोई उचित कदम उठाने की बजाए पंचायती फरमानों का समर्थन करती है...क्या ऐसे ही पंचायतें शर्मसार कर देने वाले फरमान सुनाकर महिलाओं को सरेबाज़ार उसकी आबरू को तार तार करती रहेंगी ...
शमिन्द्र कौर कलेर ...




5 टिप्‍पणियां:

  1. Administration failure to save the honour of women and implement the rules. Panchayat should take decision after all aspects of both parties.

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  2. खाप पंचायतों के फैसले पुराने समय से ही विवादास्पद रहे हैं । ये पहली बार नहीं हो रहा है कि खाप पंचायतों ने ऐसा तुगलकी फरमान सुनाया हो। खाप पंचायतों की तरफ से ऐसे फरमान अक्सर आते ही रहते हैं। जो हमें समाचार पत्रों में पढ़ने और टीवी चैनलों पर अक्सर देखने और सुनने को मिल जाते हैं। खाप पंचायतों के फैसलों को अगर देखें तो हम पाएंगे कि ये पंचायतें कहीं न कहीं महिलाओं की स्वतंत्रा की घोर विरोधी रही हैं। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि कि महिलाओं के पहनावों से लेकर उनके रहन सहन, खान—पान, पहनने—ओढ़ने, उठने—बैठने पर भी इन खाप पंचायतों ने कई तुगलकी फरमान जारी कर रखें हैं और ये बात किसी से छुपी नहीं है। इस ब्लॉग में उस महिला की पीड़ा साफ झलक रही है जिसपर ऐसे तुगलकी फरमान जारी किए गए हैं। एक तरफ तो हम कहते रहते हैं कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता वास करते हैं वहीं दूसरी तरफ खाप पंचायतों के ऐसे फरमान जिन को सुनकर ही सिर शर्म से झुक जाए उस नारी को मू चिढ़ाते जान पड़ते है जिनकी ऐसी कहावतों में हम अक्सर दुहाई देते रहते हैं। ब्लॉग लिखने वाली महोदया ने अपने इस ब्लॉग में नारी के उस दर्द को उजागर करने की कोशिश की है जिस दर्द को नारी पिछले कई सालों से सहती आ रही है। लेकिन अब वक्त सहने का नही, चुप रहने का नहीं। कुछ कर गुजरने का है।
    Pramil Dutta

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